जब खो गई सारी आशाएँ
दुःख के अंधियारे में
तुम मिले हो मुझे हमेशा
हर दीपक, हर सहारे में
कुंठा और मान से परे
ये अनोखा बन्धन है
जीवन है सांसो की माला
तू इसका स्पंदन है
तुम साथी हो धूप-छांव के
मिले हो किसी दुआ की तरह
ऐ दोस्त! तू है साथ मेरे
हर वक़्त ,खुदा की तरह- संजय सुमन
