ज़िंदगी की रफ़्तार 

ज़िंदगी की रफ़्तार यूँ दौड़ रही है 

रिश्तों का ख़ज़ाना लूट रही है 

अपनो को बेगाना कर रही है 

पर नए रिश्तों से जोड़ रही है 

इनमे ही ख़ुशियाँ ढूँढ रही है 

साजिदा