सुन री सखी 

चल बतियाएँ वो प्यारी बातें

अपनी नटकट शैतानियो को ज़ीले

चल फिर से दौड़ लगाए 

चल नदीयाँ की सैर करे 

तितलियों के पीछे भागे 

चल मस्ती में फिर से घुमे 

पंख लगाकर उड़ जाए 

चाँद को हम छूकर आए 

लोरियाँ सुनकर सोए

चल री सखी बचपन फिर से ज़ीले

साजिदा