सृष्टि के नज़ारे ..
सुबह सूरज की किरने जब निकलती है
जिससे सृष्टि मुस्कुराती रहती है
नए जीवन का वरदान हमें वो देती है
शांत हवा की सनसनाहट
मधुर वाणी सुनाती है
संग पंछी भी साज कोई गुनगुनाते है
थर थर पानी की ये लहरे
शोर कोई मचाती है
कश्तियाँ जिनमे लहरो संग घूमते रहती है
मेघ छाए है जो गहरे
बारिश की धुन वो सुनाते है
धुन ये सुनकर फसल ये सारी झूमती है
रात को जब सैर को निकले है ये तारे
रोशन करते सारे नज़ारे है
जिनसे रौनक़ हरसु रहती है
#साजिदा

