साथ हूँ मैं तेरे 

कदम तेरे डगमगाए तो डर नहीं जाना ,

साथ हूँ मैं तेरे चाहे तो आज़मा लेना 

 मेरे हमसफ़र ,मुश्किलों से डरकर रुक ना जाना ,

साथ चलूँगी तेरे चाहे जब नज़र घुमाना 

दिया है साथ हर कदम पर तुमने ,

अब मेरे हौसले कम होंगे सोचा भी कैसे तुमने ?

क्या हुआ राह में काँटे है अपने ,

चुनकर निकालेंगे उन्हें ठाना है हमने 

हुआ क्या सफ़र है कठिन अगर ,

हाथों में हाथ लेकर काटेंगे ये सफ़र 

मुझे ताक़त देनेवाले क्यूँ है तू सहमा ,

देखा है मैंने तेरी आँखो से ही आसमाँ 

सपनों को क्यूँ किया दूर तुमने खुदसे ,

आओ मिलकर सजाएँ हम ख़्वाब वो फिर से 

ज़िंदगी की हर मोड़ पर साथ चलूँगी तेरे ,

जबतक ना हारे चलकर कदम तेरे 

साजिदा