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सैर


सैरनिकली कल रात को जब घर से बाहर ,

अंजान रास्तों ने भी पुछा मुझसे हाल मेरा ,बड़े दिनों से थी सबसे बेख़बर ,

आज खिलखिलाया है फिर से चेहरा मेरा ।साजिदा

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