प्यार का जहाँ
आसमान में उड़ते हुए पहुँची मैं वहाँ ,
वाद-विवाद नहीं होते ऐसे पंछी थे जहां ।
सारे मिल-जुलकर खेल रहे थे वहाँ ।
सारे जहाँ की उलझनों से बेख़बर थे सब वहाँ ।
एक दूजें से अलग थे फिर भी सभी में समानता थी वहाँ ।
कोई किसीसे कम नहीं ये नारा था वहाँ ।
चकित हुई मैं ऐसी दुनिया देखकर वहाँ ।
मन प्रसन्न हुआ देखकर ऐसा जहाँ ।
साजिदा

