प्रेरणा 

साँझ समय था ,समुंदर के साहिल पे खड़ी थी ,

लहरों को एक-दूजे में उलझते देख रही थी ,

जानो कश्तियों का रास्ता वो लहरें रोक रही थी ,

निडर कश्तियाँ लहरोंको चिरकर आगे बढ़ रही थी ,

शायद वो मुझे कोशिश की सफलता की प्रेरणा दे रही थी 

साजिदा