प्रेम की आहट
मृगनैनी से नैन है तेरे ,कोमल सी मुस्कान ,
सुंदर सी ये चाल है तेरी सोचूँ तो लागे हिरन ,
थर-थर करते पग ये तेरे नाचे जैसे मोर ,
मधुर तेरे ये बोल लागे कोयल करती शोर ।
चंचल तेरी अदाएँ करती जाने इशारा किस ओर ,
प्रेम ऋतु आया है जैसे ले चले उस ओर ।
साजिदा

