फूलों से बातें
फूलों से की मैंने कुछ बातें ,
मन भर आया सुन उनकी वो बातें ।
फूलों ने पूछा मुझसे एक सवाल ,
उछलकर हमको क्यों करते हो बवाल ?
ख़ुशियाँ भरते है हम आपकी दुनिया में ,
क्यों नहीं रहने देते हमें हमारी बगियाँ में ?
तोड़ते हो हमें किसीको ख़ुश करने ,
ले जाते हो कभी किसीके अंतिम संस्कार करने ।
होते है हम अर्पण ख़ुशियाँ बटोर के ,
कुचलते हो क्यों हमें तुम यूँ मरोड़के ?
हर रंग हमारा कुछ न कुछ है कहता ,
आपकी ज़िंदगी के मायने है सिखाता ।
आपके आँसू पोंछते है हम कभी ,
आपको ख़ुशियाँ बाँटते है हम कभी ,
क्यों नहीं दिखते हमारे आँसू आपको कभी ?
सवालों ने फूलों के रुला दिया मुझे ,
मैंने है सोचा अब ना दुखाऊँगी ऐ फूल तूझे ।
साजिदा