निश्चय
चले है अपनी हम पहचान बनाने ,
हसीन ख़्वाब जो आँखों में बसे है उन्हें हक़ीक़त बनाने ,
नहीं जानते कितने काँटे होगे राह से हटाने ,
आगे ही बढ़ेंगे हम मंज़िल को पाने ,
नहीं देंगे हम खुद को हारने ,
साजिदा


निश्चय
चले है अपनी हम पहचान बनाने ,
हसीन ख़्वाब जो आँखों में बसे है उन्हें हक़ीक़त बनाने ,
नहीं जानते कितने काँटे होगे राह से हटाने ,
आगे ही बढ़ेंगे हम मंज़िल को पाने ,
नहीं देंगे हम खुद को हारने ,
साजिदा