निश्चयचले है अपनी हम पहचान बनाने ,हसीन ख़्वाब जो आँखों में बसे है उन्हें हक़ीक़त बनाने ,नहीं जानते कितने काँटे होगे राह से हटाने ,आगे ही बढ़ेंगे हम मंज़िल को पाने ,नहीं देंगे हम खुद को हारने ,साजिदा