मुकम्मल मोहब्बत
उन्हें अपनी मोहब्बत पर बड़ा ग़ुरूर था
हमें हमारे आशिक़ाना अन्दाज़ पर बड़ा फक्र था
मुक़ाबला दोनो ही में बराबर का था
किसिकी जीत और हार का सवाल ही नहीं था
इश्क़ को अंजाम तक पहुँचना ही था
दोनो को मुकम्मल साथ जो मिलना था
साजिदा


मुकम्मल मोहब्बत
उन्हें अपनी मोहब्बत पर बड़ा ग़ुरूर था
हमें हमारे आशिक़ाना अन्दाज़ पर बड़ा फक्र था
मुक़ाबला दोनो ही में बराबर का था
किसिकी जीत और हार का सवाल ही नहीं था
इश्क़ को अंजाम तक पहुँचना ही था
दोनो को मुकम्मल साथ जो मिलना था
साजिदा