मीत तेरा आभास 

चाँदनी देखो होले से आए 

चमचम करके कोई धुन सुनाए

दिल की बातें वो समझाए

मन ही मन में हम मुस्क़ाए 

मीत की बातें याद दिलाए 

आँखो से ना ओंझल हो जाए 

हर पल हम उन्हें निहारे जाए 

सपनों में हम यूँही खो गए 

चाँदनी को देखते हम सो जाए

साजिदा