माँ
मेरा ख़्वाब,मेरी ख्वाईश,मेरा अभिमान है तू माँ।
पलकों में छुपे आसुओंको भी कैसे देखती हो माँ।
दर्द भी मेरे ना छुपा पाती हूँ तुमसे मैं माँ।
मेरी हँसी में भी उन्हें ढूँढ लेती हो तुम माँ।
लेकर सारी बलाएँ, देती हो सारी दुवाएँ।
मेरी शरारतें, मेरी ख़ताएँ कैसे माफ़ करती हो माँ।
मेरी हर कोशिश में भी कामियाबी कैसे ढूँढ लेती हो माँ।
बुराई मेरी तुम सुन नहीं सकती, और अच्छाई सुनते तुम नहीं थकती।
सबसे प्यारी बेटी जब कहती हो मुझे तुम माँ,
सारे जहाँ की ख़ुशियाँ मेरी मुट्ठी में आ जाती है माँ।
जीवन के हर मोड़ पर गिरने से सम्भाल लेती हो माँ,
गिरकर संभलना भी सिखा देती हो तुम माँ।
माथा जब मेरा चूमती हो माँ, थकान भी दूर हो जाती है माँ।
साजिदा

