
माँ
मेरा ख़्वाब,मेरी ख्वाईश,मेरा अभिमान है तू माँ।
पलकों में छुपे आसुओंको भी कैसे देखती हो माँ।
दर्द भी मेरे ना छुपा पाती हूँ तुमसे मैं माँ।
मेरी हँसी में भी उन्हें ढूँढ लेती हो तुम माँ।
लेकर सारी बलाएँ, देती हो सारी दुवाएँ।
मेरी शरारतें, मेरी ख़ताएँ कैसे माफ़ करती हो माँ।
मेरी हर कोशिश में भी कामियाबी कैसे ढूँढ लेती Read More! Earn More! Learn More!
