क्यूँ भाए हम तुझे 

सीधी साधी छोरी मैं हूँ 

बातें तेरी समझ ना पाती

नटखट छैल छबीला है तू 

काहे तुझको मैं हूँ भाती 

अदाएँ बेमिसाल है तेरी 

काहे भाए तुझको सादगी मेरी 

तारीफ़ों का ताज है तुझ पर 

फूल तू काहे बरसाए मुझ पर 

सबकी नज़रों का चलता तुझपे तीर 

फिर भी क्यूँ कहता है मैं ही हूँ तेरी हीर 

साजिदा