कौन हो तुम ...
बंद दरवाज़े को दिल के
दस्तक देकर जाते हो
आँख जब मैं खोलती हूँ
छू मंतर हो जाते हो
ख़्वाबों में तुमको देखती हूँ
सामने क्यूँ नहीं आते हो
#साजिदा


कौन हो तुम ...
बंद दरवाज़े को दिल के
दस्तक देकर जाते हो
आँख जब मैं खोलती हूँ
छू मंतर हो जाते हो
ख़्वाबों में तुमको देखती हूँ
सामने क्यूँ नहीं आते हो
#साजिदा