फ़रेब 

मेरे दिल के क़रीब था वो 

मुझे सबसे अज़ीज़ था वो 

मेरी हर नादानियों को नज़रंदाज़ करता था वो 

हर पल साथ रहता था वो 

मेरी हर अदा पर फ़िदा था वो 

मेरे ख़्वाबों की तस्वीर था वो 

मोहब्बत बेशुमार करता था वो 

इसलिए फ़रेब भी बेमिसाल दे गया वो 

साजिदा