एक अजनबी
एक अजीब सा एहसास है
एक अजनबी लगे ख़ास है
कहना उनसे बहुत कुछ है
पर जुबाँ चुप हो जाती है
जाने दिल में कई सवाल है
समझ के सब पार है
उनकी बातों पे क्यूँ एतबार है
उनका हर लफ़्ज़ कमाल है
ये कैसा एहसास है
साजिदा


एक अजनबी
एक अजीब सा एहसास है
एक अजनबी लगे ख़ास है
कहना उनसे बहुत कुछ है
पर जुबाँ चुप हो जाती है
जाने दिल में कई सवाल है
समझ के सब पार है
उनकी बातों पे क्यूँ एतबार है
उनका हर लफ़्ज़ कमाल है
ये कैसा एहसास है
साजिदा