दिवानापन  

देखो आशिक़ी में क्या से क्या कर गए 

सारे सुर मिलाकर सरगम बना गए 

उनकी ख़ातिर हम आशिक़ बन गए 

देखते ही देखते वो हमें अपना हमदम बना गए 

साजिदा