बूँदे बारिश की 

छम-छम करते बारिश आई ,

बूँदों ने तो सृष्टि भिगाई 

बूँदें गिरती पत्तों पर ,

पत्ते खिलते पेड़ों पर 

छाता भी ना रोक पाया इन बूँदों को ,

बूँदों ने तो भीगा दिया हम सब को 

बूँदें जब गिरती खेतों पर ,

अनाज आए खिल-खिलकर 

नन्ही सी ये बूँदें भी होती है कमाल ,

जगह-जगह पर करती है ये धमाल 

जब हम हो जाते है उदास ,

बूँदें बन जाती है कुछ ख़ास 

बूँदों से कोई है गिरता ,

बूँदों से कोई है खिलता 

लेना चाहूँ हाथों में इन बूँदों को ,

फिसलकर दे देती है धोका ये मुझको 

ना समझो इन बूँदों को तुम छोटी ,

करती है ये बातें मोटी-मोटी ,

धरती पर जब आकर गिरती ,

पानी में ये खो ही जाती 

साजिदा/@hindipoemz