बेटियाँ

हूँ मैं फूल तेरे आँगन का ,

डर है तुझे अब किस बात का ?

दूँगी मैं ख़ुशबू जीवन में सबके ,

आगे बढ़ूँगी सोच-समझके 

नज़र उठाकर देख तो मुझे ,

लाई हूँ मैं सारी ख़ुशियाँ तुझे 

कम नहीं मैं आज किसीसे ,

बता दे जाक़र अब तू सभी से 

कदम से कदम मिलाकर चलु ,

सारी मुश्किलें भगाकर चलु 

मेरी आवाज़ सुनेगी दुनिया ,

देखो कितनी आगे बढ़ रही है बेटियाँ 

साजिदा