
बेटियाँ
हूँ मैं फूल तेरे आँगन का ,
डर है तुझे अब किस बात का ?
दूँगी मैं ख़ुशबू जीवन में सबके ,
आगे बढ़ूँगी सोच-समझके ।
नज़र उठाकर देख तो मुझे ,
लाई हूँ मैं सारी ख़ुशियाँ
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बेटियाँ
हूँ मैं फूल तेरे आँगन का ,
डर है तुझे अब किस बात का ?
दूँगी मैं ख़ुशबू जीवन में सबके ,
आगे बढ़ूँगी सोच-समझके ।
नज़र उठाकर देख तो मुझे ,
लाई हूँ मैं सारी ख़ुशियाँ