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आँख़े


आँखेआँखो में तेरी ये कैसा नशा है ,

जितना भी देखूँ मन ये मेरा डूब ही जाता है ,जुबाँ की बातें आँखो से बयाँ हो ही जाती है ,

जीने की उम्मीद हर दिन उन्ही से मिलती है ।साजिदा

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