अधुरा ख़्वाबअरमान थे कुछ ऐसे मेरे ,छूने थे आसमान के तारे ।छन से बादल गरजे ऐसे ,टूट गए सारे सपने जैसे ।साजिदा
अधुरा ख़्वाबअरमान थे कुछ ऐसे मेरे ,
छूने थे आसमान के तारे ।छन से बादल गरजे ऐसे ,
टूट गए सारे सपने जैसे ।साजिदा