
महामारी ये प्रचण्ड है,
पूरा विश्व बंद है,
पशु-पक्षी स्वतंत्र हैं,
इंसान अपने घर में बंद हैं,
खुशनसीब ही तो हैं वो,
जो आज अपनों के संग हैं,
अमीरों की है जैसे छुट्टियां,
गरीबों की आंखें नम हैं,
थाली तो है हाथों में,
पर खाना रोज़ थोड़ा कम है,
भविष्य है ख़तरे में, स्कूल,
काॅलेज सारे बंद हैं,
अर्थव्यवस्था चरमरा रही,
ये समय रूपी बम है,
सुनसान सड़कें चारो ओर,
शहर विरान चारो ओर,
लोग मर रहे हैं चारो ओर,
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