उठ जाग मनुज और सूरज देख, तू इतना कैसे सोता है?
ख़ुद नही है वश मे तेरा मन, इसलिए तू इतना रोता है।
ज़रा उठ और अपने बाहर देख, सुंदर दृश्य भी होता है
बस अपने में तू रह जाकर, ख़ुद कितना ख़ुद का खोता है।
जो ख़ुद के बाहर देखे तू तो, दुनिया कितनी विस्तृत है।
बस सिमट रह गया ख़ुद में तू अब, तेरी दुनिया बहुत ही सीमित है।
ऊपर अनंत आकाश है तेरे, नीचे पूरी हरियाली है।
ज़रा मन की खिड़की खोल के देख
ये सुंदर दुनिया कितनी प्यारी है।
कितने ही सूरज उगते हैं, और कितने अस्त हो जाते हैं।
पर कर्मठ जीवन जीते हैं जो,बस वही मस्त रह जाते हैं।
बस चारदीवारी के अंदर, तेरी सिमटी दुनियादारी है।
जरा खिड़की खोल के दृश्य तो देख
ईश्वर की सृजित ये धरती कितनी प्यारी है।।
~ #रश्मि_रंजन✍
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