माँ मुझे तेरी याद सताती है, अपने अच्छे दिन की याद दिलाती हैं। वो तुझसे रूठना और फिर लिपटना, दिल के सारे एहसास जगाती हैं।।   तुझ बिन सब सूना सा लगता हैं, सब पास हैं मेरे फिर भी अधूरा लगता हैं। बिन तेरे जैसे अब खाने में वो स्वाद नही, तेरे जैसी चिंता करने वाला कोई पास नही।।   सब अपनी खुशियों इच्छाओं को जाहिर करते हैं, एक तू ही हैं जो मेरी खुशियों से खुश होती हैं। मेरे निराशाओं को चुटकी मे हरने वाली मां, तेरे बिन सब पाकर भी खालीपन लगता हैं। तेरे बिन इस दुनिया में सब पराया लगता हैं।।   सुशील अनजान