हो रहा मदहोश जमाना,
जाने किस एहसास में।
गूंज रही हैं बुलन्द आवाजें,
आज देश के हर भाग में।।
हो रहा है अत्याचार,
बिक रही आज़दियाँ।
रंग गयी सड़के अब तो,
खेल लहू की होलियां।।
मदहोशी मे चूर फिर भी,
सत्ता की किलकारियां।
मन्दिर मस्जिद मूर्तियों से,
व्यस्त फिर भी आवाम यहाँ।।
जाने किस लेनिन की देखो,
लड़ी जा रही लड़ाई यहां।
सुलग रहा देश दुविधाओं से,
बज रही फिर भी तालियां।।
ढोंग पाखण्ड के नाम पर,
लूटा जा रहा हैं भारत आज।
फिर भी सब मदहोश हैं अब,
जाने किस का इंतजार हैं अब।।
सम्भल जाओ अब भी प्यारे,
नही फिर बस पछताओगे।
जाति धर्म के बंधन तोड़ो,
फिर कुछ नही कर पाओगे।।
आतंकवाद भ्रष्टाचार बढ़ रहा दिन रोज अब,
फूट डालकर लूटा जा रहा हमको प्रतिदिन अब।
जाने किस मदहोशी मे सब आंख बंद बैठे हैं अब,
उठो प्यारे उठ बैठो संभालो अपने वतन को अब।।