जीवन का आधार बेटी हैं, नई दुनिया की शुरुआत बेटी हैं। बेटी ही होती घर की रौनक, घर का सम्मान भी बस बेटी हैं।। मां भी होती हैं किसी की बेटी, बहन भी तो है एक बेटी। घर की शोभा अगर बहु से है, वो बहु भी है किसी की बेटी।। बेटी समझ की मूरत हैं होती, प्यार और त्याग की छाया होती। कभी अपने घर को करती रोशन, फिर ससुराल की रौनक होती।। छोटे छोटे नन्हे कपोलों से अपने, घर को सुंदर मन्दिर बना देती। मां बन कर घर के आंगन को, हर खुशी से परिपूर्ण कर देती।। जाने क्यों आज इंसान दानव बना, अपनी ही खुशियो का हैवान बना। खुशहाली देने वाली बेटी के, क्यों प्राणों का संघारक बना।। बिन बेटी जीवन रुक जाएगा, इस धरती का पोषण रुक जाएगा। अस्तित्व लुप्त हो जाएगा बिन बेटी, इंसान का वजूद छिप जाएगा।।