आज फिर हलचल मच गई, सुना हैं फिर कही आग लग गयी। इतिहास को बचाने की राह में, फिर मासूमों की जान अटक गई। आज फिर कही हलचल मच गई।। चलचित्र की कुछ नादानी रोकने को, फिर लोगो की टोली बन गयी। अपनी मनमानी करने की खातिर, फिर गरीब मजदूर की जान पर बन गयी। आज फिर कही हलचल मच गई।। दूर गांव मे किसान पैसों को परेशान, यहाँ नायिका की नाक पर करोड़ो की बोली लग गई। सरकारों के बन रहे आपसी मतभेद, वहां किसी गरीब की झुग्गी जल गई। आज फिर कही हलचल मच गई।। खामोशी से प्रशासन देख रहा मदारी का खेल, लगता हैं पुलिस फिर से बिक गयी। राजनेताओं की राजनीति के खेल में, कुछ लोगों की टोली फिर शहंशाह बन गयी। आज फिर कही हलचल मच गई।।