हाँ मुझे सुकून चाहिए,
सर-ए-आम लफ़्जों में कह दूँ तो तू चाहिए |
जो हाथ उठे इबादत में,
तो दुआ के रूप में तू चाहिए,
जो मैं करूँ नवरात्रि का पाठ,
तो आशीर्वाद के फल में भी तू चाहिए |
अगर तू हार है,
तो हाँ मुझे शिकस्त चाहिए,
तू अगर जीत हैं,
तो मुझे यश चाहिए,
ना तेरे पहले,
ना तेरे बाद,
मुझे हर हालात में तू चाहिए ।
हाँ मुझे सुकून चाहिए,
सर-ए-आम लफ़्जों में कह दूँ तो तू चाहिए ||


