दर-बदर भटक रहा हूँ,

नगें पैर चल रहा हूँ,

हाथ में दो-चार निवाले,

झोली मेरी खाली है,

प्रतिक्षण प्रयत्न करते हुए,

संघर्ष मेरा जारी है |


कभी यहाँ, कभी वहाँ,

कभी इस दर, कभी उस दर,

बेघर तो पहले ही था,

अब भटका दर-बदर,

नगें पाँव थके मेरे,

पर साहस मेरा बलशाली है,

प्रतिक्षण प्रयत्न करते हुए,

संघर्ष मेरा जारी है |


राह के कोने में पड़ा,

रात भर बेबस,लाचार,

वेदना हृदय को बींधती हुई,

करुणा से भरा हुआ मेरा मन,

मै अकेला नहीं इस पीड़ा में,

साथ में मेरी घरवाली है,

प्रतिक्षण प्रयत्न करते हुए,

संघर्ष मेरा जारी है ||