समय की अद्भुत मार है,

हर कोई बेबस् और लाचार है।

एक तरह जख़्मी जनता,

तो दूसरी तरफ भूखी-सी- सरकार है।

जाए किस तरफ प्रश्न ये तैयार है,

हल्की सी किरण के बीच धुँधली सी पुकार है।

वर्तमान समय से लोहा लेता ऐ मनुष्य,

तुझे समय का नमस्कार है।।


               प्रीति सिंह