शिक्षा ली,

पद लिया,

आत्मनिर्भर बन कर भी दिखलाया,

पर फिर भी जाने क्यों,

हमारा समाज,

पुरुष प्रधान ही कहलाया।।

     

                   प्रीति सिंह