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मेरा अभिमान


असम्भव है ये,की आपको दूँ मैं अपने शब्दों से मान,

क्योंकि अपने ही दी है हमारे सपनों को उड़ान।मैं बार- बार करती हूँ आपको प्रणाम,

मेरे पिता मेरा अभिमान ।।।प्रीति सिंह

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