"है दूर का सफर,

और रास्ता अँधेरा ।

सीधा सा व्यक्तित्व,

स्वस्तिक सा बसेरा।

ना मैं कवियत्री,

ना मैं लेखिका ।

नाम में है प्रेम, 

और हूँ स्वयं एक सेविका ।

आभार आपका 

कि दिया मुझें ये मंच ।

स्वीकारा आपने मुझें,

मेरी कविताओं के संग ।।