चांद को निहारते निहारते,
जब पलकें भारी होकर,
स्वप्न प्रेमिका के सजाने लगे।
तब एक गीत नया तुम बना देना,
अपने स्वरों को,पिरोकर अक्षरों के
प्रेम रूपी विश्वास के धागे में,
अपना नाम विश्वास को,
और भी महिमामय बना देना।
@PoojaAuthor


चांद को निहारते निहारते,
जब पलकें भारी होकर,
स्वप्न प्रेमिका के सजाने लगे।
तब एक गीत नया तुम बना देना,
अपने स्वरों को,पिरोकर अक्षरों के
प्रेम रूपी विश्वास के धागे में,
अपना नाम विश्वास को,
और भी महिमामय बना देना।
@PoojaAuthor