
कुछ फूल, कुछ कलियां
महके गुलशन, माली की बगिया।
ना जाने कितनी बार,
खून पसीने से उसने सींचा।
अनजान एक आवारा टिड्डा,
उड़कर आया, खा डाली कलियां।
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कुछ फूल, कुछ कलियां
महके गुलशन, माली की बगिया।
ना जाने कितनी बार,
खून पसीने से उसने सींचा।
अनजान एक आवारा टिड्डा,
उड़कर आया, खा डाली कलियां।