एक बड़ा सा #शून्य,
और उसकी परिधि पर,
लाचार, चिंतित
चक्कर लगाता मैं।
सांसों की डोरी में,
मुश्किलों के बिंदुओं के संग
हताश, परेशान
जिंदगी से भागता मैं।
फिर कोई अचानक,
एक ठहराव,
कोई खींचता मुझे,
उस मुख्य बिंदु में समाता मैं।
फिर से होता विलीन,
रूप सौंदर्य परिधि से परे,
अनंत का पर्याय देख,
एक नया रास्ता तलाशता मैं।
@PoojaAuthor / पूजा इन्दोरिया शर्मा


