चांद का सौंदर्य, धवल चांदनी से है।

प्रेमिका का सौंदर्य, प्रेमी के प्रेम से है।

धरती का सौंदर्य, प्रकृति से है।

कविता का सौंदर्य,कवि-हृदय के भावों से है।

पाठक का सौंदर्य, उसके विचारों से है।

देश का सौंदर्य, वीरता और एकता में है।


 @PoojaAuthor / पूजा इन्दोरिया शर्मा