1 min read 777K reads

रूप


शबनम की बूंद जैसा पानी।बदन तेरा,जैसे शीशे पर फिसलता पानी।शरारत तेरी,जैसे जुगनू करे मनमानी।प्यार तेरा,जैसे हंसो की जोड़ी करे चुहलबाज़ी।

— @PoojaAuthor / पूजा इन्दोरिया शर्मा
Read more Earn more Learn more