मुमकिन नहीं जानना,#राज प्रेमी दिलों का।रात के काले अंधेरे में भी,प्रभात के सूरज की लालिमा,लगती है, महबूबा की बिंदिया।दिन होते ही चिड़िया का चहचहाना,लगता है, जैसे प्रियतमा का सुरीला गाना।