वो कसती रही #फब्तियां,हम नैन लड़ाते रहे।उसके लफ्ज़ों को,अपने गजलों में पिरोते रहे।वक़्त का तकाज़ा ही ना रहा हमें,वो दुल्हन बनके हमसे रुख़सत हो गए।
वो कसती रही #फब्तियां,हम नैन लड़ाते रहे।
उसके लफ्ज़ों को,अपने गजलों में पिरोते रहे।
वक़्त का तकाज़ा ही ना रहा हमें,वो दुल्हन बनके हमसे रुख़सत हो गए।