सीता हरण करके भी,

रावण ने नहीं उसे छुआ था।

वो मर्यादा तो उसने भी,

धर्म अपना निभाया था।

आज के कुछ पुरुष,

बच्ची को भी कुदृष्टि डालकर,

पशु से पतित होने का सबूत देता है।

समाज फिर भी चुपचाप से,

औरत को और भी पिंजरे में बंद कर देता है।


@PoojaAuthor / पूजा इन्दोरिया शर्मा