ओ माली ओ सुन माली

एक वृक्ष के हम संगी - साथी

मैं इस डाली, वो उस डाली।

वो भी आम, मैं भी आम

तो क्या हिन्दू और मुसलमान।

हम सब है एक समान

यही पूजा की वाणी

क्योंकि बिन फूल और अंबी

उसकी डाली ख़ाली, तो

मेरी डाली भी ख़ाली

छोडें हम ये तेरी और मेरी

ना माने एक दूजे को दोषी

भारतवर्ष के सभी भाई

तनिक सोचें, बनें ना अज्ञानी

साथ मिलकर चीर डालें

गहन तिमिर पतझड़ और आंधी।


- Pooja Indoria Sharma

@PoojaAuthor