जब जब तू मुझेआफताब कहता है।मन कहता है कि,यही है वो जिसकी,मुझे ताउम्र तलाश रही।चांद सा नूर कहलाने की,नहीं है ख्वाहिश कोई।आफ़ताब सी दमकने की,कामना है अब फलक पर।