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कामना


जब जब तू मुझेआफताब कहता है।मन कहता है कि,यही है वो जिसकी,मुझे ताउम्र तलाश रही।चांद सा नूर कहलाने की,नहीं है ख्वाहिश कोई।आफ़ताब सी दमकने की,कामना है अब फलक पर।

— @PoojaAuthor
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