मैं मधुर मोहिनीसांझ की बेला सुहानी।चतुर चंचल मनमोहककुदरत की कहानी।प्रचंड तेज ताप से तपी,तम का करती तिलक रूहानी।सौंदर्य की अंगड़ाई में निखरी,मदमस्त उमंग से लिपटी ओ मेरे प्रेमी।
मैं मधुर मोहिनीसांझ की बेला सुहानी।
चतुर चंचल मनमोहककुदरत की कहानी।
प्रचंड तेज ताप से तपी,तम का करती तिलक रूहानी।
सौंदर्य की अंगड़ाई में निखरी,मदमस्त उमंग से लिपटी ओ मेरे प्रेमी।