कभी सोचते है, हम भी सब के जैसे हो जाए।
कोई भी गर दिल को ठेस पहुंचाए,
उन्हें खूब सुनाए।
सबको हम भी नीचा दिखाएं।
फिर लेकिन सोचते है,
हम भी ऐसा करते तो, खुद में खुद कहां रह जाते।
खुद को कैसे पहचान पाते।
अनजाने में कवि हृदय की आवाज़ को दबा देते।


कभी सोचते है, हम भी सब के जैसे हो जाए।
कोई भी गर दिल को ठेस पहुंचाए,
उन्हें खूब सुनाए।
सबको हम भी नीचा दिखाएं।
फिर लेकिन सोचते है,
हम भी ऐसा करते तो, खुद में खुद कहां रह जाते।
खुद को कैसे पहचान पाते।
अनजाने में कवि हृदय की आवाज़ को दबा देते।