कुछ #अनकहा सा,
तेरे मेरे दरमियान,
इश्क़ की एक,
सौगात बन गई।
रोज तेरे दर पर,
मेरा यूं चले आना,
इश्क़ की इबादत बन गई।
जिस्म के चाहने वाले नहीं हम,
तेरी इबादत करने वाले,
हम तेरे पुजारी बन गए।
रोज शाम मोती से अश्क तेरे,
मिटाने वाले हम, हमदर्द बन गए।
@PoojaAuthor / पूजा इन्दोरिया शर्मा


