अक्सर जिंदगी बीत जाती है,
मोहब्बत को दर - ब - दर खोजते हुए
कि कमबख्त इंतजार करती है,
दहलीज पर ही लबों को सीले हुए
नादानी हमेशा हमने ही की है,
कि उसके हाथों की लकीरें मिट गई
हमारे अश्कों को मिटाते हुए
तमन्ना - ए - हुस्न भी बड़ी खुदगर्जी है,
कि उसके कदम झुलस गए
हमारी किस्मत के शोले बुझाते हुए।
@PoojaAuthor


