#आंचल चिरकाल जिंदा रहता है।

आंचल का कोई धर्म, जाति नहीं,

ये बस प्रेम देना जानता है।

हम और तुम धरती मां के आंचल में,

पूरी जिंदगी बेफिक्र हो गुजारते है।

लेकिन आंचल को मेला करते है।

भाव, विचार और झगड़ों से।

भूल जाते है, जीयो और जीने दो का भाव।

और लगा देते है, दाग।


@PoojaAuthor / पूजा इन्दोरिया शर्मा